Thursday, 28 November 2013 | By: AbhiLaSH RuHeLa

कहानी "एक मुलाकात-ज़िंदगी से..." का एक अंश! उफ्फ़ ये जज़्बात Coming soon!

986th BLOG POST -->>


          I hope everyone of you remember my first published work that released this year in February- Uff Ye Emotions. I don't know whether it did reasonably well or not but people say that it did. The best option for me is to believe them. :-)

             Mr. Vinit Bansal, the editor of this book, thought of bringing out the Hindi version of this book which wasn't planned initially. After the book got popular, he thought of taking it to another level and making it available for Hindi readers too. It's my honour to share the two paragraphs that Mr. Vinit sent me as a sample out of the 5000 words story that I wrote in the original English version. I know the Hindi version looks better but don't forget, if there would have been an English version of it, this could have never got birth. Haha! I know my insecurity is quite visible. Whoever worked in the translation should be applauded for his work. A terrific job done. 

           Here are the two paragraphs for all of you. Comments needed.

Abhilash Ruhela की कहानी "एक मुलाकात-ज़िंदगी से..." का एक अंश
#उफ्फ़ ये जज़्बात Coming soon!


"उसने लाचार नजरों से मेरी तरफ देखा। कोई गलती ना होने पर भी वह सिर्फ एक लड़की होने की सजा भुगत रही थी और उसके पास खड़े इंसान-नुमा गिद्ध भूखी नजरों से उसे ताक रहे थे। मैने आव देखा न ताव… खड़ा होकर उसके करीब गया, उसका हाथ पकड़ा और उसे अपनी तरफ खींच लिया। अब मैं उसके बहुत पास खड़ा था और उसकी पीठ गाड़ी के दरवाजे के पास लगे डिवाइडर से सटी थी। उसे बचाने के लिए मैने अपने दोनों हाथों को उसके दोनों तरफ के डिवाइडर पर रख दिया ताकि कोई भी उसे छूने ना सके। वो सभी लड़के जो कुछ मिनट पहले अकेला देखकर उसे घूर रहे थे, अचानक से इधर-उधर देखने लगे। उन्होंने शायद सोचा भी नहीं था कि गाड़ी में कोई उसे जानने वाला होगा। जैसे ही किसी स्टेशन पर ट्रेन रूकती, लोग उतरते-चढ़ते, हम एक-दूसरे के और भी करीब आ जाते... वह हर बार कोशिश करती कि मेरी तरफ न देखे, लेकिन हम दोनो के बीच की नाममात्र की दूरी उसे ऐसा करने ना देती। तीन साल पहले की छुअन का अहसास अचानक जैसे फिर से ज़िंदा हो गया था। और कब हम दोनों एक-दूसरे की आंखों में आंखें डालकर बीते दिनों की यादों में अपना अक्स ढूंढने लगे, हमें पता ही नही चला"

‘सच्चा प्यार कभी नहीं मरता’। हां कभी-कभी दूरियां बीच में आ जाती हैं और कुछ गलतफहमियां भी। लेकिन अगर प्यार सच्चा हो तो कोई भी दूरी, चाहे वो कितने ही वक्त के लिए ही क्यों ना हो, रिश्तों के उस अहसास को खत्म नहीं कर सकती जो दो दिल एक-दूसरे के लिए महसूस करते हैं।

  Please say that the English version written by me was better. Please. No? Ok. Bye! See you with Uff Ye Jazbaat. :-)

 Thanks.

 ABHILASH RUHELA - VEERU!!!

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